
अयोध्या: अयोध्या के राम मंदिर में दान की रकम की कथित चोरी का मामला एक बार फिर राजनीतिक विवाद का विषय बन गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मामले में आठ आरोपियों के खिलाफ तीसरी बार भी आरोप तय नहीं हो सके हैं। पार्टी ने सवाल उठाया है कि मंदिर ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारी चंपत राय और अनिल मिश्रा को आरोपी बनाने के बजाय गवाह क्यों बनाया गया। कांग्रेस ने यह भी मांग की है कि मामले में जिम्मेदार लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो और दान की रकम का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाए।
कांग्रेस ने भाजपा पर साधा निशाना
कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मामले के असली दोषियों को बचाने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस का कहना है कि जांच केवल आठ कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पूरे मामले में जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि राम मंदिर से जुड़े कार्यों का श्रेय लेने के मामले में वे आगे रहते हैं, लेकिन दान की रकम की कथित चोरी पर जवाबदेही तय करने की बात आने पर उनकी ओर से स्पष्ट प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई है।
तीसरी बार भी आरोप तय नहीं होने पर सवाल
कांग्रेस के मुताबिक, मामले में आठ आरोपियों के खिलाफ तीसरी बार भी आरोप तय नहीं हो सके। पार्टी ने दावा किया कि आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए, लेकिन मंदिर की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग और ऑडियो उपलब्ध कराने की मांग अब भी लंबित है।
जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि पूरी रिकॉर्डिंग सामने लाने में देरी क्यों हो रही है। कांग्रेस का दावा है कि रिकॉर्डिंग से मामले से जुड़े अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। हालांकि, रिकॉर्डिंग में क्या दर्ज है और उससे मामले पर क्या असर पड़ेगा, यह संबंधित सामग्री सामने आने और जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

दान की रकम और सीसीटीवी फुटेज को लेकर क्या आरोप हैं?
जयराम रमेश ने दावा किया कि मंदिर में दान की रकम हटाए जाने की 105 घटनाएं सीसीटीवी कैमरों में दर्ज हुई थीं। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2020 की ऑडिट रिपोर्ट में इस संबंध में चेतावनी दी गई थी। कांग्रेस के अनुसार, इसके बाद 4 जून को चोरी से जुड़ा एक वीडियो सामने आया और 25 जून को प्राथमिकी दर्ज की गई।
कांग्रेस का आरोप है कि इन घटनाक्रमों के बावजूद पूरे मामले में जवाबदेही तय नहीं हुई है। पार्टी ने ऑडिट रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज, वित्तीय लेनदेन और ठेकों में कथित कमीशनखोरी की जांच कराने की मांग की है।
हालांकि, ये सभी आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं। इन्हें जांच या न्यायिक प्रक्रिया में साबित हुए तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
चंपत राय और अनिल मिश्रा को लेकर कांग्रेस के सवाल
कांग्रेस ने सवाल किया है कि मंदिर ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारी चंपत राय और अनिल मिश्रा को आरोपी बनाने के बजाय गवाह क्यों बनाया गया। पार्टी ने यह भी पूछा कि क्या कथित चोरी की जिम्मेदारी केवल आठ कर्मचारियों तक सीमित रखी जाएगी या अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की भी जांच होगी।
कांग्रेस ने पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही, पार्टी ने कहा है कि श्रीराम के नाम पर मिले चंदे और कीमती दान का पूरा हिसाब जनता के सामने रखा जाना चाहिए।
इस मामले को लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं। फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों और जांच से जुड़ी सभी जानकारियों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।









