
नई दिल्ली: जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय ने एक छात्रा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। छात्रा पर आरोप है कि उसने गलत जानकारी देकर आपातकालीन छुट्टी ली और बाद में छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शन में शामिल हुई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रा से 24 घंटे के भीतर लिखित जवाब मांगा है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
बेगम हजरत महल गर्ल्स हॉस्टल की प्रोवोस्ट ने 27 अक्टूबर को यह नोटिस जारी किया। इसमें आपातकालीन छुट्टी के कथित दुरुपयोग को छात्रावास के अनुशासन का उल्लंघन बताया गया है।
24 नवंबर तक ऑनलाइन चलेंगी कक्षाएं
विश्वविद्यालय ने ऑनलाइन कक्षाओं की अवधि बढ़ाकर 24 नवंबर तक कर दी है। पहले ऑनलाइन कक्षाएं 8 नवंबर तक निर्धारित थीं। 28 अक्टूबर को जारी आदेश के मुताबिक, डीन और विश्वविद्यालय के अधिकारियों की बैठक में परिसर की स्थिति और छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया।

आदेश में कहा गया कि मौजूदा परिस्थितियों में परिसर में आमने-सामने की कक्षाएं संचालित करना शैक्षणिक गतिविधियों के लिए उपयुक्त नहीं माना गया।
परीक्षाओं और छुट्टियों का नया कार्यक्रम
विश्वविद्यालय के आदेश के अनुसार, विषम सेमेस्टर की परीक्षाएं ऑनलाइन आयोजित की जाएंगी। प्रैक्टिकल, फील्डवर्क, प्रोजेक्ट, वाइवा और माइनर प्रोजेक्ट की परीक्षाएं 25 से 30 नवंबर तक होंगी।
अंतिम सेमेस्टर की थ्योरी परीक्षाएं 1 दिसंबर से 24 दिसंबर तक आयोजित करने का कार्यक्रम है। इसके बाद 25 दिसंबर से 12 जनवरी 2027 तक शीतकालीन अवकाश रहेगा। सम सेमेस्टर की कक्षाएं 13 जनवरी से शुरू होने वाली हैं।
वहीं, छात्रावास की अनुशासन समिति ने हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों को 1 नवंबर तक अनिवार्य छुट्टी लेने के लिए कहा है।
18 दिनों से छात्र संघ की बहाली की मांग
जामिया परिसर में पिछले 18 दिनों से छात्र संघ की बहाली और चुनाव कार्यक्रम घोषित करने की मांग को लेकर प्रदर्शन चल रहा है। छात्र जामिया मिलिया इस्लामिया छात्र संघ (जेएमआईएसयू) को दोबारा बहाल करने और चुनाव की प्रक्रिया शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शन के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराने की बात कही है। हालांकि, छात्रों की आपत्ति है कि संविधान को मंजूरी देने की कोई स्पष्ट समय सीमा तय नहीं की गई है।
छात्र संघ 2006 में किया गया था भंग
विश्वविद्यालय के शिक्षकों के अनुसार, छात्र संघ को वर्ष 2006 में हिंसा और शिक्षकों पर हमलों की घटनाओं के बाद भंग कर दिया गया था। हालिया आदेश में प्रदर्शन के दौरान जारी किए गए निलंबन और कारण बताओ नोटिस रद्द करने की बात भी कही गई है।
इसके अलावा, सुरक्षा कर्मचारियों के आचरण की जांच के लिए एक समिति गठित करने का प्रावधान किया गया है।
परिसर में तोड़फोड़ का भी आरोप
विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रदर्शन के दौरान परिसर में तोड़फोड़ होने का आरोप लगाया है। प्रशासन के मुताबिक, इस दौरान गेट और सीसीटीवी सिस्टम को नुकसान पहुंचा। दूसरी ओर, छात्र संघ की बहाली और चुनाव की समय सीमा तय करने की मांग को लेकर छात्रों का असंतोष बना हुआ है।
फिलहाल, विश्वविद्यालय में ऑनलाइन कक्षाएं जारी रखने और छात्रावास से जुड़े निर्देशों के बीच छात्र संघ की बहाली को लेकर विवाद बना हुआ है।









