“राम मंदिर ट्रस्ट CEO नियुक्ति को लेकर सरकार गंभीर मंथन कर रही है। चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में वित्तीय पारदर्शिता और प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत करने के लिए सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी की नियुक्ति पर विचार किया जा रहा है। अयोध्या की ताजा खबर पढ़ें।“
अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में जल्द ही मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) की नियुक्ति हो सकती है। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण सामने आने के बाद सरकार ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में गंभीर मंथन कर रही है। सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट में किसी अनुभवी एवं बेदाग छवि वाले सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी को CEO के रूप में नियुक्त करने पर विचार किया जा रहा है।
सरकारी स्तर पर इस संबंध में विधिक प्रक्रिया की जानकारी जुटाई जा रही है। माना जा रहा है कि CEO की नियुक्ति से मंदिर में प्राप्त होने वाले दान, चढ़ावा और अन्य वित्तीय गतिविधियों में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
देश के अन्य प्रमुख मंदिरों की तर्ज पर होगा प्रबंधन
सूत्रों का कहना है कि देश के कई प्रमुख धार्मिक संस्थानों और मंदिरों में प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति पहले से की जाती रही है। इसी मॉडल को ध्यान में रखते हुए राम मंदिर ट्रस्ट में भी प्रशासनिक ढांचे को और व्यवस्थित करने की योजना बनाई जा रही है।
सरकार का मानना है कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या और करोड़ों रुपये के चढ़ावे को देखते हुए पेशेवर प्रबंधन व्यवस्था आवश्यक हो गई है। इससे मंदिर की आर्थिक गतिविधियों की निगरानी और संचालन अधिक प्रभावी हो सकेगा।
2020 में हुआ था श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन
गौरतलब है कि 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद केंद्र सरकार ने 5 फरवरी 2020 को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया था। इसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में की थी।
ट्रस्ट के गठन के समय मणिरामदास छावनी के महंत नृत्यगोपाल दास को अध्यक्ष और विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेता चंपत राय को महासचिव बनाया गया था। इसके बाद ट्रस्ट में प्रमुख संतों, सामाजिक प्रतिनिधियों और स्थानीय सदस्यों को शामिल किया गया।
ट्रस्ट में वर्तमान में 14 सदस्य, एक पद रिक्त
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट कुल 15 सदस्यों वाला निकाय है। इनमें 12 सदस्य मनोनीत और 3 पदेन सदस्य शामिल हैं। पदेन सदस्यों में केंद्र सरकार, राज्य सरकार और अयोध्या के जिलाधिकारी के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।
ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद उनके स्थान पर पूर्व आईएफएस अधिकारी कृष्ण मोहन को ट्रस्टी बनाया गया था। वहीं अयोध्या राज परिवार के प्रमुख एवं ट्रस्टी बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद से एक पद अभी भी रिक्त चल रहा है।
अब चर्चा इस बात की है कि सरकार CEO की नियुक्ति इसी रिक्त पद पर करेगी या फिर अलग से नया पद सृजित किया जाएगा। यदि नया पद बनाया जाता है तो ट्रस्ट के सदस्यों की संख्या बढ़कर 16 हो सकती है।
पारदर्शिता और जवाबदेही होगी प्राथमिकता
विशेषज्ञों का मानना है कि CEO की नियुक्ति होने पर मंदिर प्रशासन में आधुनिक प्रबंधन प्रणाली लागू करने, वित्तीय ऑडिट को मजबूत बनाने और श्रद्धालुओं के विश्वास को और सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी। चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद उठे सवालों के बीच यह कदम ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक, मनोरंजन और खेल और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”









