गन्ना किसानों के लिए केंद्र का बड़ा फैसला, एक सप्ताह में बनेगी हाईलेवल कमेटी; चीनी मिलों की होगी जांच

“ केंद्र सरकार गन्ना किसानों की समस्याओं की जांच के लिए एक सप्ताह में हाईलेवल कमेटी बनाएगी। समिति चीनी रिकवरी, गन्ने की तौल, कटाई के समय और लैब टेस्टिंग की प्रक्रिया की समीक्षा करेगी।“

नई दिल्ली। गन्ना किसानों की समस्याओं और चीनी मिलों में गन्ने की तौल, चीनी रिकवरी तथा प्रयोगशाला जांच से जुड़ी कथित अनियमितताओं को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। केंद्र सरकार एक सप्ताह के भीतर विशेष उच्चस्तरीय संयुक्त समिति का गठन करेगी। यह समिति गन्ने की कटाई के सही समय, चीनी रिकवरी मापने के वैज्ञानिक मानकों, आधुनिक प्रयोगशाला परीक्षण प्रणाली और गन्ने की तौल की सटीकता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की समीक्षा करेगी।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने सोमवार को कर्नाटक और महाराष्ट्र के गन्ना किसान संगठनों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद यह निर्णय घोषित किया। बैठक में किसानों ने चीनी मिलों में गन्ने की रिकवरी के आंकड़ों में अंतर, वजन में कटौती, कथित तौर पर वास्तविक रिकवरी की जानकारी छिपाने और फसल बीमा से संबंधित समस्याएं उठाईं।

एक सप्ताह में गठित होगी संयुक्त समिति

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, प्रस्तावित समिति में केंद्र सरकार, कर्नाटक और महाराष्ट्र की राज्य सरकारों, किसान संगठनों के अधिकृत प्रतिनिधियों, चीनी मिलों के प्रतिनिधियों तथा वैज्ञानिक विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। समिति को निर्धारित समयसीमा के भीतर सरकार के सामने व्यावहारिक सुझाव और सिफारिशें प्रस्तुत करनी होंगी।

सरकार का उद्देश्य किसानों की शिकायतों का केवल अस्थायी समाधान करना नहीं, बल्कि ऐसी पारदर्शी व्यवस्था विकसित करना है, जिससे भविष्य में गन्ना किसानों को उनके वैध भुगतान से वंचित किए जाने की आशंका कम हो।

चीनी रिकवरी के आंकड़ों और तौल की होगी जांच

गन्ने से कितनी मात्रा में चीनी प्राप्त होती है, इसे चीनी रिकवरी कहा जाता है। रिकवरी के आंकड़े गन्ना मूल्य निर्धारण और चीनी मिलों के कामकाज से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं में शामिल हैं। किसानों ने शिकायत की कि कुछ मामलों में मिलों की ओर से बताए गए रिकवरी आंकड़ों और वास्तविक स्थिति को लेकर अंतर की आशंका है।

समिति इस विषय के तकनीकी और वैज्ञानिक पहलुओं की जांच करेगी। इसमें रिकवरी मापने के मानक, प्रयोगशालाओं में नमूनों की जांच, गन्ने की तौल की शुद्धता और कटाई के समय का प्रभाव शामिल होगा। आधुनिक परीक्षण प्रणालियों की उपयोगिता का भी आकलन किया जाएगा, ताकि जांच प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय और पारदर्शी बन सके।

शिवराज सिंह चौहान ने बताई किसानों की शिकायतों की गंभीरता

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों की ओर से उठाए गए मुद्दों को गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि रिकवरी के आंकड़ों में अंतर, वजन में कटौती और वास्तविक चीनी रिकवरी को लेकर पारदर्शिता की कमी जैसी शिकायतों का स्थायी समाधान जरूरी है।

चौहान के मुताबिक, ऐसी वैज्ञानिक और पारदर्शी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिससे कोई भी चीनी मिल किसानों को उनके जायज भुगतान से वंचित न कर सके। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार उनके सुझावों पर संवेदनशीलता के साथ विचार करेगी और बिना किसी भेदभाव के आवश्यक कदम उठाएगी।

तात्कालिक और दीर्घकालिक उपायों पर होगा काम

बैठक में समस्याओं के समाधान के लिए दो स्तरों पर काम करने का निर्णय लिया गया। पहले स्तर पर तत्काल प्रशासनिक सुधार लागू करने पर जोर रहेगा, ताकि किसानों की मौजूदा परेशानियों को दूर किया जा सके। दूसरे स्तर पर नीतिगत और तकनीकी व्यवस्थाओं को मजबूत किया जाएगा, जिससे समस्याओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

राज्य सरकारों से भी किसानों के हित में शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए सहयोग मांगा गया है। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय के जरिए शिकायतों की जांच और समाधान की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने की तैयारी है।

एफआरपी निर्धारण में पारदर्शिता पर भी चर्चा

बैठक में केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (Fair and Remunerative Price—FRP) के निर्धारण की वैज्ञानिक प्रक्रिया और उत्पादन लागत के आकलन के तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्य सरकारों और किसान संगठनों के साथ मिलकर व्यवस्था के प्रत्येक स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है।

अब प्रस्तावित समिति के गठन और उसकी सिफारिशों पर नजर रहेगी। समिति की रिपोर्ट से यह तय करने में मदद मिल सकती है कि गन्ने की तौल, चीनी रिकवरी के आकलन और प्रयोगशाला परीक्षण में किन सुधारों की जरूरत है। किसानों को वास्तविक राहत कितनी और कब मिलेगी, यह आगे किए जाने वाले फैसलों और उनके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।

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