
पेरिस: यूरोप के कई देशों में गुरुवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कई यात्री विमानों को बम से उड़ाने की धमकियां मिलीं। सुरक्षा के मद्देनजर कुछ विमानों का रास्ता बदलना पड़ा, जबकि कई की आपातकालीन लैंडिंग कराई गई। हालांकि, जांच के दौरान किसी भी विमान में विस्फोटक सामग्री नहीं मिली। पिछले कुछ दिनों में इस तरह की यह दूसरी बड़ी घटना बताई जा रही है।
फ्रांस में आयरिश विमान की इमरजेंसी लैंडिंग
डबलिन से रोम जा रही एयरलिंगस की फ्लाइट EI402 को सुरक्षा कारणों से फ्रांस के एव्रेक्स एयरपोर्ट पर उतारा गया। यह एयरपोर्ट पेरिस से करीब 100 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। विमान में बम होने की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने यह कदम उठाया।
इटली में फाइटर जेट्स ने विमान को सुरक्षा दी
हेलसिंकी से रोम जा रही फिनएयर की एक उड़ान को इटली की वायु सेना के लड़ाकू विमानों ने सुरक्षा घेरे में लिया। इसके बाद विमान को रोम के फिमिसिनो एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतारा गया। जांच के दौरान विमान में कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली।

बेल्जियम और बुल्गारिया में भी अलर्ट
बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स के जविएंतेम एयरपोर्ट पर पोलैंड की LOT एयरलाइंस के विमान को उतारा गया। सुरक्षा जांच के बाद उसमें भी कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली।
वहीं, बुल्गारिया में तीन विमानों की आपातकालीन लैंडिंग करानी पड़ी। इनमें से दो विमान सोफिया और एक प्लोवदिव में उतारा गया।
चेक गणराज्य और रोमानिया में भी मिली धमकी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चेक गणराज्य की राजधानी प्राग जा रहे चार विमानों को बम की धमकी मिली थी। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों ने जांच के बाद खतरे को कम माना।
इसके अलावा मिलान से बुखारेस्ट जा रही विज एयर की एक उड़ान से करीब 200 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। रोमानिया के अधिकारियों ने बम निरोधक दस्ते की मदद से विमान की जांच की।
दो दिन पहले भी मिली थीं ऐसी धमकियां
बताया जा रहा है कि महज दो दिन पहले भी कम से कम सात विमानों और एक क्रूज जहाज को इसी तरह की धमकियां मिली थीं। राहत की बात यह रही कि जांच के दौरान किसी भी जगह विस्फोटक सामग्री बरामद नहीं हुई। शुरुआती जांच में ये धमकियां झूठी साबित हुईं।
साइबर हमलों से भी जुड़ रहे हैं मामले
अभी तक किसी देश या संगठन ने इन धमकियों की जिम्मेदारी नहीं ली है। हालांकि, यूरोपीय अधिकारियों को आशंका है कि इन घटनाओं के पीछे हाइब्रिड हमलों या तोड़फोड़ की कोशिश हो सकती है। कुछ अधिकारियों ने रूस और ईरान से जुड़े संभावित नेटवर्क पर भी संदेह जताया है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इसी सप्ताह अज्ञात हैकर्स ने यूरोप के कुछ देशों में सुपरमार्केट और फ्रांस के ब्लड बैंकों की कूलिंग व्यवस्था को भी बाधित किया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि फर्जी बम धमकियों और साइबर हमलों के जरिए कम खर्च में बड़े स्तर पर डर और अव्यवस्था फैलाने की कोशिश की जा सकती है। फिलहाल यूरोपीय देशों की सुरक्षा एजेंसियां इन घटनाओं की जांच में जुटी हैं।









