“अल नीनो 2026 को लेकर WMO का अलर्ट, मई से भारत में भीषण गर्मी और कम बारिश की संभावना। जानें El Niño का असर, मानसून, जल संकट और हीटवेव की पूरी रिपोर्ट।“
नई दिल्ली। दुनियाभर के मौसम पर असर डालने वाली जलवायु घटना एल नीनो इस बार तय समय से पहले दस्तक दे सकती है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के ताज़ा अलर्ट के अनुसार, मई से जुलाई के बीच एल नीनो की स्थिति विकसित होने की प्रबल संभावना है, जिसका असर भारत सहित पूरे दक्षिण एशिया में देखने को मिल सकता है।
मई-जून में बढ़ेगी गर्मी, घट सकती है बारिश
WMO के मुताबिक, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान तेजी से बढ़ रहा है—जो एल नीनो के बनने का स्पष्ट संकेत है। इसका सीधा असर जमीन के तापमान पर पड़ेगा, जिससे मई, जून और जुलाई के दौरान सामान्य से अधिक गर्मी पड़ने की आशंका है।
भारत में पहले ही मौसम विभाग ने इस साल औसत से कम वर्षा का अनुमान जताया है। ऐसे में एल नीनो की स्थिति बनने से मानसून कमजोर पड़ सकता है और कई क्षेत्रों में सूखे जैसे हालात बन सकते हैं।
हर 2–7 साल में आता है एल नीनो
एल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु चक्र है, जो हर 2 से 7 साल में विकसित होता है और आमतौर पर 9 से 12 महीनों तक प्रभावी रहता है। इसके दौरान वैश्विक तापमान में वृद्धि होती है और वर्षा के पैटर्न में बदलाव आता है।
इसका असर सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और अफ्रीका जैसे कई क्षेत्रों में भी देखा जाता है—जहां कहीं सूखा तो कहीं अत्यधिक वर्षा जैसी स्थितियां बनती हैं।
हिमालय में बर्फ की कमी से बढ़ी चिंता
रिपोर्ट के अनुसार, हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में इस साल बर्फ की मात्रा सामान्य से 27.8% कम दर्ज की गई है—जो पिछले दो दशकों में सबसे कम है।
इसका सीधा असर नदियों के जलस्तर पर पड़ सकता है और लगभग 2 अरब लोगों की जल सुरक्षा खतरे में आ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में जल संकट और गहरा सकता है।
कृषि, ऊर्जा और स्वास्थ्य पर पड़ेगा असर
WMO ने स्पष्ट किया है कि ऐसे जलवायु पूर्वानुमान कृषि, जल प्रबंधन, ऊर्जा और स्वास्थ्य क्षेत्रों के लिए बेहद अहम होते हैं। बढ़ती गर्मी से फसलों पर असर, बिजली की मांग में वृद्धि और हीटवेव से स्वास्थ्य संकट जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
विशेषज्ञों ने सरकारों और संबंधित एजेंसियों को समय रहते तैयारी करने और आपदा प्रबंधन योजनाओं को मजबूत करने की सलाह दी है।
मई से संभावित एल नीनो का असर केवल मौसम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह जल, खाद्य और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए भी बड़ी चुनौती बन सकता है। ऐसे में सतर्कता, पूर्व तैयारी और वैज्ञानिक रणनीति ही इस संकट से निपटने का सबसे प्रभावी उपाय साबित हो सकती है।
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