“भारत और अमेरिका 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य के साथ ऐतिहासिक व्यापार समझौते के बेहद करीब पहुंच गए हैं। ऊर्जा, तकनीक, रक्षा और निवेश सहयोग इस समझौते का प्रमुख हिस्सा होंगे।“
नई दिल्ली/वॉशिंगटन। भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी एक नए दौर में प्रवेश करती दिखाई दे रही है। दोनों देश एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच गए हैं। इस प्रस्तावित समझौते का उद्देश्य वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय की वरिष्ठ अधिकारी Bethany Polos Morrison ने कैपिटल हिल में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि दोनों देश इस ऐतिहासिक समझौते के अंतिम चरण में हैं और इसे जल्द मूर्त रूप दिया जा सकता है।
‘मिशन 500’ के जरिए व्यापार में बड़ी छलांग की तैयारी
भारत और अमेरिका ने द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य को “मिशन 500” नाम दिया है। इस पहल के तहत दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की योजना बनाई गई है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री Narendra Modi और अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के नेतृत्व में दोनों देश केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि ठोस और परिणाम आधारित साझेदारी पर जोर दे रहे हैं।
भारत करेगा 500 अरब डॉलर की खरीदारी
प्रस्तावित समझौते के तहत भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर मूल्य के उत्पादों और सेवाओं की खरीद कर सकता है। इसमें ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातुएं, कोकिंग कोल और अत्याधुनिक तकनीकी उपकरण शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक विकास को मजबूती मिलेगी, जबकि अमेरिकी कंपनियों को भारत के विशाल बाजार तक बेहतर पहुंच प्राप्त होगी।
ऊर्जा और परमाणु सहयोग को मिलेगा बढ़ावा
दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। हाल के वर्षों में हाइड्रोकार्बन व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और इसका आकार 14 अरब डॉलर से अधिक पहुंच चुका है।
इसके साथ ही दोनों देश नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी काम कर रहे हैं, जिससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिल सकता है।
अमेरिका में बढ़ रहा भारतीय निवेश
भारतीय कंपनियां भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से निवेश बढ़ा रही हैं। हाल ही में आयोजित SelectUSA निवेश सम्मेलन में भारतीय कंपनियों ने करीब 20 अरब डॉलर के नए निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।
इसे अमेरिका में भारतीय निवेश के इतिहास की सबसे बड़ी घोषणाओं में से एक माना जा रहा है।
टैरिफ मुद्दों पर जारी है बातचीत
हाल के महीनों में अमेरिकी टैरिफ नीतियों में बदलाव और न्यायिक फैसलों के बाद व्यापार समझौते के कुछ प्रावधानों पर पुनर्विचार किया जा रहा है।
इसी सिलसिले में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि Jamieson Greer भारत दौरे पर हैं और केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal के साथ बातचीत कर रहे हैं।
दोनों देशों की कोशिश है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए अस्थायी 10 प्रतिशत टैरिफ की समयसीमा समाप्त होने से पहले एक अंतरिम समझौते को लागू कर दिया जाए।
भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है अमेरिका
वित्त वर्ष 2025-26 में अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा। इस दौरान भारत का अमेरिका को निर्यात 87.3 अरब डॉलर रहा, जबकि अमेरिका से आयात बढ़कर 52.9 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
हालांकि भारत का व्यापार अधिशेष घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि नए समझौते से व्यापार संतुलन और आर्थिक सहयोग दोनों को नई दिशा मिलेगी।
शिक्षा और प्रतिभा भी मजबूत कर रही रिश्ते
व्यापार और निवेश के अलावा शिक्षा क्षेत्र भी दोनों देशों के रिश्तों का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है। वर्तमान में 3.3 लाख से अधिक भारतीय छात्र अमेरिका के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में अध्ययन कर रहे हैं और वे अमेरिकी अर्थव्यवस्था में हर वर्ष अरबों डॉलर का योगदान दे रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि प्रस्तावित व्यापार समझौता तय समय पर लागू हो जाता है, तो यह केवल आर्थिक साझेदारी ही नहीं बल्कि भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंधों के लिए भी एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हो सकता है।
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