झांसी में बांदा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का जेई एक लाख रुपये और आगरा में बिजली विभाग का जेई व संविदाकर्मी 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार। दोनों मामलों में भ्रष्टाचार की जांच और कार्रवाई हुई।
UP Vigilance Action: उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस टीम ने झांसी और आगरा में दो अलग-अलग कार्रवाइयां की हैं। झांसी की टीम ने बांदा स्थित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय में तैनात जूनियर इंजीनियर (जेई) सलमान को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। वहीं, आगरा में बिजली विभाग के जेई विनेश यादव और संविदाकर्मी लोकेंद्र सिंह को 10 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेते पकड़ा गया। दोनों मामलों में शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस ने गोपनीय जांच और ट्रैप की कार्रवाई की थी।
बांदा में एक लाख रुपये की रिश्वत लेते जेई गिरफ्तार
पहली कार्रवाई झांसी विजिलेंस टीम ने बांदा में की। यहां प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय में तैनात जेई सलमान पर ग्रेनाइट प्लांट संचालक से एक लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, जेई ने नोटिस पर कार्रवाई नहीं करने के बदले यह रकम मांगी थी।
ग्रेनाइट प्लांट संचालक ने इस मामले में झांसी विजिलेंस से संपर्क कर शिकायती पत्र दिया था। शिकायत के अनुसार, 18 जून 2026 को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कार्यालय की ओर से उसे व्हाट्सएप पर नोटिस भेजा गया था। संचालक का आरोप था कि यह नोटिस बिना किसी सर्वे के भेजा गया।
इसके बाद उसे क्षेत्रीय कार्यालय बुलाया गया, जहां क्षेत्रीय अधिकारी माधवी कमलवंशी से मुलाकात के बाद उसे जेई सलमान के पास भेजा गया। आरोप है कि जेई ने नोटिस पर कार्रवाई नहीं करने के बदले एक लाख रुपये की मांग की। शिकायतकर्ता ने रकम कम करने की बात कही तो कथित तौर पर जेई ने कम पैसे में काम नहीं होने की बात कही।
गोपनीय जांच के बाद बिछाया गया जाल
शिकायत मिलने के बाद झांसी विजिलेंस ने मामले की गोपनीय जांच कराई। विजिलेंस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए गए। इसके बाद 2 नवंबर को टीम ने शिकायतकर्ता के माध्यम से जेई को एक लाख रुपये दिलवाए और उसे रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी सलमान के खिलाफ बांदा शहर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई गई है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
आगरा में बिजली कनेक्शन के नाम पर मांगी 10 हजार की रिश्वत
दूसरी कार्रवाई आगरा में हुई। यहां विजिलेंस टीम ने बिजली विभाग के अवर अभियंता विनेश यादव और संविदाकर्मी लोकेंद्र सिंह को 10 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेते गिरफ्तार किया।
दोनों आरोपी फतेहाबाद खंड के विद्युत उपखंड शमसाबाद में तैनात थे। आरोप है कि उन्होंने नए बिजली कनेक्शन के नाम पर 10 हजार रुपये मांगे थे।
शमसाबाद निवासी अर्जुन ने विजिलेंस टीम को दी शिकायत में बताया कि उन्होंने नए मकान में बिजली कनेक्शन के लिए 24 अक्टूबर को आवेदन किया था। कनेक्शन से पहले स्थल निरीक्षण करने पहुंचे कर्मचारियों ने उन्हें जेई विनेश यादव से संपर्क करने को कहा।
अर्जुन के मुताबिक, जेई ने कनेक्शन जारी करने के बदले 10 हजार रुपये की मांग की। शिकायतकर्ता का आरोप है कि रकम नहीं देने के कारण उनका बिजली कनेक्शन अब तक जारी नहीं हुआ था।
संविदाकर्मी को बताया गया जेई का एजेंट
अर्जुन की शिकायत मिलने के बाद आगरा विजिलेंस ने ट्रैप से पहले गोपनीय जांच कराई। इसके बाद आरोपियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया। शिकायतकर्ता को तय रकम देने के लिए भेजा गया और विजिलेंस टीम पहले से मौके पर तैनात रही।
एसपी विजिलेंस राजकुमार अग्रवाल के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान जेई विनेश यादव के साथ संविदाकर्मी लोकेंद्र सिंह भी पकड़ा गया। उन्होंने बताया कि संविदाकर्मी क्षेत्र में जेई के एजेंट के तौर पर काम करता था और रिश्वत की रकम लेकर जेई तक पहुंचाता था।
दोनों आरोपियों के खिलाफ विजिलेंस थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
दो शहरों में कार्रवाई से सरकारी विभागों में हलचल
झांसी और आगरा में हुई इन कार्रवाइयों में सरकारी विभागों के कर्मचारियों पर अलग-अलग कामों के बदले रिश्वत मांगने के आरोप सामने आए हैं। एक मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नोटिस पर कार्रवाई रोकने के बदले रकम मांगने का आरोप है, जबकि दूसरे मामले में नए बिजली कनेक्शन के लिए रिश्वत मांगने की शिकायत की गई थी।
विजिलेंस की कार्रवाई के बाद दोनों मामलों में अब आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।









