कौशांबी पटाखा गोदाम ब्लास्ट: मुख्य आरोपी नौशाद अली मुठभेड़ में गिरफ्तार, IG ने इंस्पेक्टर समेत सात पुलिसकर्मियों को किया निलंबित

कौशांबी पटाखा गोदाम ब्लास्ट मामले में मुख्य आरोपी नौशाद अली को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के पैर में गोली लगी है। मामले में लापरवाही पर IG ने इंस्पेक्टर समेत सात पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया है।

कौशांबी/प्रयागराज।कौशांबी के पिपरी थाना क्षेत्र के चिल्ला शहबाजी गांव में संचालित अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। सोमवार सुबह हुए इस हादसे में 11 लोगों की मौत और पांच लोगों के गंभीर रूप से घायल होने के बाद फरार चल रहे मुख्य आरोपी नौशाद अली को पुलिस ने मंगलवार तड़के मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में आरोपी के पैर में गोली लगी, जिसके बाद उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

वहीं, इस मामले में पुलिस की लापरवाही भी सामने आने के बाद प्रयागराज परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक ने तत्कालीन थाना प्रभारी और चायल चौकी से जुड़े अधिकारियों समेत कुल सात पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। कार्रवाई को लेकर पुलिस महकमे में भी हड़कंप मचा है।

पुलिस टीम पर फायरिंग के बाद हुई मुठभेड़

क्षेत्राधिकारी चायल शिवांक सिंह के अनुसार, पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट के बाद मुख्य आरोपी नौशाद अली फरार हो गया था। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थीं। इसी दौरान पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि नौशाद अली बाहर भागने की कोशिश में चरवा थाना क्षेत्र के तेरह मील स्थित एक बंद पड़े ईंट भट्ठे के पास छिपा हुआ है।

सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने इलाके की घेराबंदी की। पुलिस के मुताबिक, खुद को घिरा देखकर नौशाद अली ने टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली आरोपी के पैर में लगी। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से अवैध तमंचा और कारतूस बरामद किए गए हैं।

घायल आरोपी को तत्काल अस्पताल भेजा गया, जहां उसका उपचार चल रहा है। पुलिस अब मामले में फरार अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है।

लाइसेंस रद होने के बाद भी चला रहा था अवैध कारोबार

जांच में सामने आया है कि नौशाद अली का पटाखा लाइसेंस पहले ही अनियमितताओं के चलते रद किया जा चुका था। इसके बावजूद उसने कथित तौर पर अवैध रूप से पटाखों का निर्माण और भंडारण जारी रखा।

पुलिस ने इससे पहले भी अवैध पटाखा निर्माण के मामले में उसके खिलाफ कार्रवाई की थी और उसे जेल भेजा गया था। हालांकि, जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद उसने फिर से अवैध पटाखा फैक्ट्री शुरू कर दी। लंबे समय तक अवैध गतिविधियां जारी रहने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने को पुलिस की गंभीर लापरवाही माना गया है।

11 लोगों की मौत से दहला कौशांबी

पिपरी और पूरामुफ्ती थाना क्षेत्र की सीमा पर स्थित पटाखा गोदाम में सोमवार सुबह हुए विस्फोट की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आसपास के कई मकान भी क्षतिग्रस्त हो गए। विस्फोट के बाद लगी भीषण आग में 11 लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच लोग गंभीर रूप से घायल हुए।

हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के स्वजन और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है। मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।

छह आरोपियों के खिलाफ FIR

पटाखा गोदाम में हुए विस्फोट के मामले में पिपरी थाने में छह आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। नौशाद अली, शकील, शबाना, कहकसा बानो, आदिल और साइना, सभी निवासी महमूदपुर मनौरी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 105, 288 और विस्फोटक अधिनियम की धाराओं 4, 5 व 9बी के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

पुलिस ने दो महिला आरोपियों शबाना और साइना को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। वहीं, अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। गिरफ्तार नौशाद अली मामले में नामजद आरोपी मोहम्मद आदिल का पिता बताया गया है।

सात पुलिस अधिकारियों पर गिरी गाज

अवैध पटाखा कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई नहीं करने के मामले में प्रयागराज परिक्षेत्र के IG ने कड़ा रुख अपनाया है। मामले में तत्कालीन थाना प्रभारी पिपरी और चायल चौकी से जुड़े अधिकारियों समेत सात पुलिस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

निलंबित पुलिस अधिकारियों में निरीक्षक शिवचरण राम, उपनिरीक्षक विकास सिंह, उपनिरीक्षक विनय सिंह, उपनिरीक्षक अजीत कुमार सिंह, उपनिरीक्षक अभिषेक गुप्ता, उपनिरीक्षक मनीष पाल और उपनिरीक्षक अमित द्विवेदी शामिल हैं। इनमें कुछ अधिकारी घटना के समय पिपरी थाना और चायल चौकी में तैनात थे, जबकि बाद में उनका तबादला अन्य स्थानों पर हो गया था।

पुलिस अधिकारियों की भूमिका और लापरवाही की जांच भी की जा रही है। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर थाना प्रभारी और चौकी प्रभारियों समेत अन्य पुलिसकर्मियों पर भी विभागीय कार्रवाई की गई है।

पहले भी हुई थी पुलिस कार्रवाई, फिर भी नहीं रुका कारोबार

जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि नौशाद अली के खिलाफ पहले से कार्रवाई की जा चुकी थी। लाइसेंस रद होने और जेल जाने के बावजूद उसके दोबारा अवैध कारोबार में सक्रिय होने से पुलिस की निगरानी और कार्रवाई पर सवाल खड़े हुए हैं।

घटना के बाद पुलिस प्रशासन अब अवैध पटाखा निर्माण और भंडारण के खिलाफ अभियान चलाने की तैयारी में है। अधिकारियों को ऐसे स्थानों की जांच करने और नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

गोरखपुर में भी अवैध विस्फोटक सामग्री का भंडारण पकड़ा गया

कौशांबी हादसे के बाद गोरखपुर पुलिस-प्रशासन भी अवैध पटाखा और विस्फोटक सामग्री के भंडारण को लेकर सतर्क हो गया है। सिकरीगंज थाना क्षेत्र के ढखवा बाजार में पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से विस्फोटक सामग्री रखने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है।

नायब तहसीलदार खजनी जाकिर हुसैन के नेतृत्व में सोमवार को लाइसेंसी पटाखा विक्रेता दयाशंकर के गोदाम की जांच की गई। निरीक्षण के दौरान गोदाम खाली मिला। इसके बाद दयाशंकर के मकान की तलाशी ली गई, जहां बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री और रेडीमेड पटाखे बरामद किए गए।

मामले में दयाशंकर और उसके बेटे गणेश दत्त को गिरफ्तार किया गया है। सिकरीगंज थाने के प्रभारी आशीष दुबे के अनुसार, दोनों के खिलाफ विस्फोटक अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। कौशांबी हादसे के बाद गोरखपुर में हुई इस कार्रवाई ने भी अवैध पटाखा भंडारण को लेकर प्रशासन की सतर्कता बढ़ा दी है।

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