
नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने 13 राज्यों में मतदाता सूची से जुड़े आंकड़े साझा करते हुए आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में कई तरह की गड़बड़ियां सामने आई हैं। खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर 1 नवंबर को प्रस्तावित विपक्ष की रैली को दबाने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया।
खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि इंडिया गठबंधन हर नागरिक के वोट और संविधान की रक्षा के लिए अपना लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखेगा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, ये खरगे और कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोप हैं।

13 राज्यों में SIR प्रक्रिया पर उठाए सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक समेत कई राज्यों में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान सामने आई कथित गड़बड़ियों का जिक्र किया।
उत्तर प्रदेश: खरगे के मुताबिक, पीलीभीत में फॉर्म-8 में बदलाव से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले में 10,470 प्रविष्टियों को लेकर एफआईआर दर्ज की गई और राज्यव्यापी ऑडिट शुरू हुआ। इसके अलावा, विधान परिषद की मतदाता सूचियों में 158 नामों के हिंदी लिप्यंतरण से जुड़ी गलतियां सामने आने का भी दावा किया गया।
महाराष्ट्र: कांग्रेस ने दावा किया कि एसआईआर की ड्राफ्ट मतदाता सूची से 2.07 करोड़ नाम हटाए गए। विधान परिषद की सूचियों में कंप्यूटर और स्वचालित अनुवाद से जुड़ी गलतियों का भी मुद्दा उठाया गया।
पश्चिम बंगाल: खरगे ने दावा किया कि विधानसभा चुनावों के बाद मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों की अपीलों में से 93 फीसदी मामलों में अपीलकर्ताओं को सफलता मिली।
राजस्थान: कांग्रेस ने भारतीय निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग की सूचियों के बीच करीब 30 लाख विसंगतियां होने का दावा किया।
गुजरात: खरगे के अनुसार, एसआईआर के बाद मतदाता सूची में 68.12 लाख नाम कम हुए हैं। नाम दोबारा जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाए जाने का भी उल्लेख किया गया।
कर्नाटक: कांग्रेस ने फॉर्म-7 के इस्तेमाल पर सवाल उठाए। पार्टी का दावा है कि 61,059 लोगों के नाम हटाने के लिए चुनाव अधिकारियों ने स्वयं फॉर्म भरे।
आंध्र प्रदेश: खरगे ने 20,959 फॉर्म-7 आवेदनों का जिक्र किया, जिनमें कथित तौर पर चुनाव अधिकारियों को आपत्ति दर्ज कराने वाला बताया गया।
ओडिशा: धामनगर में 3,000 से अधिक नाम हटाने के आवेदन आने और बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) की ओर से इनके दुरुपयोग की आशंका जताए जाने का दावा किया गया।
तेलंगाना: कांग्रेस के मुताबिक, ड्राफ्ट मतदाता सूची से 73.39 लाख नाम बाहर किए गए।
झारखंड: चतरा विधानसभा क्षेत्र में 4,790 फॉर्म-7 आवेदन आने का उल्लेख किया गया। दावा है कि ये राज्य में आए कुल आवेदनों का करीब 36 फीसदी थे।
हरियाणा: खरगे ने 44.91 लाख सत्यापन नोटिस जारी होने और 1 अक्टूबर तक 4.35 लाख सुनवाई लंबित रहने का दावा किया।
दिल्ली: कांग्रेस के मुताबिक, ड्राफ्ट मतदाता सूची से 47.5 लाख नाम हटाए गए। पार्टी ने मीडिया रिपोर्टों के बाद फॉर्म-6 के निपटारे से जुड़े आंकड़ों में संशोधन का भी जिक्र किया।
गोवा: खरगे ने ECINet में रोलबैक सुविधा की कमी का मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि 97 पात्र मतदाताओं के नाम शुरुआत में बहाल नहीं हो सके।
1 नवंबर की रैली को लेकर भी लगाए आरोप
खरगे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह विपक्ष के प्रस्तावित जन-आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी सवाल उठाए।
कांग्रेस अध्यक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में पारदर्शिता और नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा जरूरी है। वहीं, साझा किए गए आंकड़ों और आरोपों पर संबंधित चुनाव अधिकारियों या केंद्र सरकार का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।






