
आज 6 नवंबर को देशभर में धनतेरस का त्योहार श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। दिवाली से ठीक दो दिन पहले आने वाले इस पर्व का हिंदू धर्म में खास महत्व है। आज के दिन लोग सोना-चांदी, बर्तन और दूसरी नई चीजों की खरीदारी करते हैं। माना जाता है कि धनतेरस पर नई चीजें खरीदने से घर में सुख-समृद्धि आती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर धनतेरस क्यों मनाया जाता है और इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा करने की परंपरा कैसे शुरू हुई?
दरअसल, पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, धनतेरस का संबंध समुद्र मंथन से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि जब देवताओं और असुरों ने अमृत पाने के लिए समुद्र मंथन किया था, तब समुद्र से कई अनमोल रत्न और दिव्य चीजें निकली थीं। इसी दौरान भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि को भगवान विष्णु का अवतार और आयुर्वेद तथा चिकित्सा का देवता माना जाता है। मान्यता है कि उनके प्राकट्य की खुशी में ही हर साल कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस मनाया जाता है।

अब सवाल है कि धनतेरस पर किन देवी-देवताओं की पूजा की जाती है? इस दिन भगवान धन्वंतरि के साथ मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करने की परंपरा है। जहां मां लक्ष्मी को धन और वैभव की देवी माना जाता है, वहीं भगवान कुबेर को धन का देवता कहा जाता है। भगवान धन्वंतरि की पूजा करके लोग अपने परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना करते हैं।
धनतेरस के दिन सुबह घर की साफ-सफाई करने के बाद पूजा स्थल को सजाया जाता है। शाम के समय भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा की जाती है। फूल, दीपक और पारंपरिक पूजा सामग्री अर्पित की जाती है। इसके अलावा घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने की भी परंपरा है। लोग अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार सोना, चांदी, पीतल या दूसरे बर्तनों की खरीदारी भी करते हैं।
धनतेरस का सबसे बड़ा संदेश यही है कि जीवन में सिर्फ धन-दौलत ही जरूरी नहीं है, बल्कि अच्छा स्वास्थ्य भी सबसे बड़ी संपत्ति है। इसीलिए इस पर्व पर धन के साथ आरोग्य की भी कामना की जाती है।
तो आज धनतेरस के इस शुभ अवसर पर भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करें और अपने परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें। आप सभी को धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएं।









