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“हुमायूं कबीर बाबरी मस्जिद विवाद पर सियासत गरमा गई है। टीएमसी विधायक की मस्जिद निर्माण घोषणा पर भाजपा-विहिप ने विरोध जताया, जबकि सपा और बरेलवी मौलाना ने समर्थन किया। चुनावी नैरेटिव, राजनीतिक बयानबाज़ी और विवाद के सभी पहलू यहाँ पढ़ें।”

हाईलाइट्स: –

  • टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद बनवाने की घोषणा कर दी
  • भाजपा, विहिप इसके विरोध में उतरे, कहा-बाबर को अब फिर जिंदा न होने देंगे
  • समाजवादी पार्टी और मौलाना शहाबुद्दीन बरेलवी ने किया मस्जिद का समर्थन

अभयानंद शुक्ल
समन्वय सम्पादक

पश्चिम बंगाल से उठा सियासी तूफान अब यूपी में भी असर दिखाने लगा है। टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद में नई बाबरी मस्जिद बनवाने की घोषणा कर एक तूफान खड़ा कर दिया है।

हुमायूं कबीर की इस बाबरी मस्जिद का समर्थन उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने भी कर दिया है। इसके साथ ही मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने भी समर्थन करते हुए कहा है कि ये किसी भी मुसलमान का हक है कि वह मस्जिद बनाए और किसी के भी नाम पर बनाए। जबकि भारतीय जनता पार्टी और विश्व हिंदू परिषद ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि अब किसी भी कीमत पर बाबर को जिंदा करने की कोशिश को सफल नहीं होने देंगे।

अयोध्या के एक महंत परमहंस आचार्य ने तो हुमायूं कबीर का सिर काटने वाले को एक करोड़ का इनाम देने की घोषणा कर दी है। कुल मिलाकर हुमायूं कबीर ने ठहरे हुए पानी में कंकड़ फेंक दिया है। अब देखना यह है कि लहर कितनी देर तक रहती है।
असल में पश्चिम बंगाल के टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर ने घोषणा की है कि वे पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में नई बाबरी मस्जिद बनाएंगे, और इसकी नींव की पहली ईट 6 दिसंबर को रखी जाएगी।

6 दिसंबर वही तारीख है, जिस दिन अयोध्या का विवादित ढांचा गिराया गया था और जिसे मुस्लिम समुदाय बाबरी मस्जिद की शहादत का दिन मानता है। हुमायूं कबीर की घोषणा के बाद बयानबाजियों का दौर शुरू हो गया है।

इस बारे में विश्व हिंदू परिषद ने कहा है कि हम देश में पुनः बाबर को जिंदा करने की कोशिशें सफल नहीं होने देंगे, और इसे हर हालत में रोकेंगे। विश्व हिंदू परिषद के नेता विनोद बंसल ने कहा है कि ये ममता बनर्जी की और टीएमसी की जेहादी सोच का परिचायक है।

बीएचपी नेता का कहना है कि बाबर तो मर गया पर बाबर की औलादें अभी जिंदा है। इसीलिए हुमायूं कबीर को बाबर से प्यार है, लेकिन विश्व हिंदू परिषद उसके मंसूबे कामयाब नहीं होने देगी।

वहीं भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा है कि ममता बनर्जी की टीएमसी के डीएनए में ही भारत विरोधी सोच है। इसी के चलते जब पश्चिम बंगाल में चुनाव नजदीक आ रहे हैं, तो ऐसी बात की जा रही है। उनका कहना है कि हुमायूं कबीर तो मोहरा है, असल में यह सोच ममता बनर्जी की है।

उधर एक टीवी डिबेट में टीएमसी समर्थक बादल देवनाथ ने इस मामले से पल्ला झाड़ते हुए कहा है कि हुमायूं कबीर का अब पार्टी से कोई संबंध नहीं रह गया है। वे अब क्या कर रहे हैं, इससे टीएमसी का लेना-देना नहीं है। लेकिन वे इस सवाल का जवाब नहीं दे पाए कि अगर ऐसा है तो ममता की सरकार ने अब तक हुमायूं कबीर पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की।

उधर टीएमसी विधायक द्वारा बाबरी मस्जिद बनाने की घोषणा का अयोध्या की तपस्वी छावनी के महंत जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने विरोध करते हुए विधायक हुमायूं कबीर पर इनाम घोषित कर दिया है। उन्होंने कहा कि जो हुमायूं कबीर की गर्दन काटकर लाएगा, मैं उसे एक करोड़ रुपए दूंगा। उन्होंने यह भी कहा कि मुगल आक्रांताओं के नाम पर अगर कहीं भी कोई एक भी ईंट रखेगा तो, उस व्यक्ति को जिंदा नहीं छोड़ा जाएगा। और इसे सुझाव या धमकी कुछ भी समझा जा सकता है।

महंत ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ यह विवाद खत्म हो गया है। अब बाबर के नाम पर कोई भी दुस्साहस करेगा, तो ठीक नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जब 25 नवंबर को ध्वजारोहण होने जा रहा है तो इसी बीच षड्यंत्रपूर्वक पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने बयान दिलवाया है।

इस बारे में समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता तारीक खां ने कन्नी काटते हुए उल्टे सवाल किया कि अयोध्या के एक महंत ने घोषणा की है कि हुमायूं कबीर की गर्दन काट कर लान वाले को एक करोड़ देंगे, इस तालिबानी सोच पर भाजपा और संत समाज का क्या कहना है। एक टीवी डिबेट में जब ये सवाल उठा तो भाजपा प्रवक्ता शिवम त्यागी और विश्व हिंदू परिषद के नेता विनोद बंसल ने तुरंत इस ऐलान की निंदा कर दी लेकिन फिर भी सपा प्रवक्ता तारिक खां ने बाबरी मस्जिद निर्माण के सवाल पर कोई जवाब नहीं दिया। जबकि सपा के दूसरे प्रवक्ता रविदास मेहरोत्रा ने कहा है कि देश में हर किसी को अपने हिसाब से धर्म स्थल बनाने का हक है। और उसे इस बात का भी हक है कि उसका नाम क्या रखना है। अगर हुमायूं कबीर बाबरी मस्जिद बनाने की बात करते हैं तो, इसमें गलत क्या है।

असल में समाजवादी पार्टी ने बीते लोस चुनाव में यूपी की भदोही सीट टीएमसी को दी थी, इसलिए उसकी सियासी मजबूरी है इसका समर्थन करना। उससे इसी जवाब की उम्मीद भी थी। और लगभग यही बात बरेली के मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने भी कहा है। उनका कहना है कि अगर कोई मुसलमान अपनी जमीन पर मस्जिद बनाना चाहता है, और उसका नाम बाबरी मस्जिद रखना चाहता है तो, इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। ये उसका संवैधानिक अधिकार है।

ऐसे में सवाल ये नहीं है कि कोई नयी मस्जिद बन रही है। देश में मस्जिदें बनती रहती हैं, उस पर किसी को कोई आपत्ति नहीं है। किंतु जब अयोध्या में राम मंदिर के ध्वजारोहण समारोह की तैयारियां चल रही हैं, और पश्चिम बंगाल में आने वाले 6 महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं, तो बाबरी मस्जिद की बात करके और बाबर के नाम को फिर जिंदा करके जो चुनावी नैरेटिव गढने की कोशिश की जा रही है, सवाल उस पर है।

हिंदू संगठन जहां इस बात को लेकर परेशान हैं कि बाबर के नाम के फिर जिंदा हो जाने से एक बार फिर तनाव बढ़ेगा और हिंदू एक जुटता की लहर कमजोर होगी वहीं टीएमसी का यह मानना है कि बाबर के नाम पर वह मुस्लिम मतों को और यूनाइटेड कर लेगी। कुल मिलकर लड़ाई चुनावी नैरेटिव की है।

खैर, जब धुआं उठा है, तो आग तो जलनी ही है। और यह आग किस-किस को जलाएगी, सवाल इसका भी है।

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